6-7 मई 2017 को ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ का चौथा महासम्मेलन

प्रिय संगी साथियो ,
जोहार!

‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ झारखंडी लेखकों, कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, मीडियाकर्मियों और बुद्धिजीवियों का अखिल भारतीय मंच है जो पिछले 14 वर्षों से झारखंड के भाषा और साहित्य के विकास के लिए वृहत्तर झारखंड में सक्रिय और सृजनरत है। इसकी संबद्धता किसी भी राजनीतिक दल से नहीं है और यह आदिवासियत-झारखंडियत के दर्शन को अपना लक्ष्य मानता है। यह सरकारी अथवा गैर-सरकारी वित्तीय फंड/सहयोग से चलनेवाला कोई एनजीओ भी नहीं है। ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ पूरी तरह से झारखंडी समाज के सहयोग पर निर्भर और जनसमुदाय के आर्थिक मदद से संचालित होनेवाला मंच है।

‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ झारखण्डी भाषाओं के प्रचार-प्रसार, संरक्षण और विकास के लिए संकल्पबद्ध है। 2003 में स्थापित अखड़ा प्रत्येक 3 वर्ष पर झारखण्डी भाषाओं, लेखकों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और संस्कृतिकर्मियों का अखिल भारतीय महासम्मेलन आयोजित करता है। इस साहित्यिक-सांस्कृतिक महासम्मेलन का उद्देश्य झारखण्डी भाषा-साहित्य के लेखकों को प्रोत्साहित करना तथा संबंधित क्षेत्रों में हो रहे बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और अकादमिक सवालों व कार्यों को रेखांकित करना है।

इस वर्ष 6-7 मई 2017 को ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ का चौथा महासम्मेलन रांची विश्वविद्यालय के शहीद स्मृति केन्द्रीय पुस्तकालय सभागार, मोरहाबादी, रांची (झारखंड) में होना निश्चित हुआ है।

महासम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों सहित झारखंड के 300 से भी अधिक लेखक, कलाकार, साहित्यकार, भाषाविद, मीडियाकर्मी, बुद्धिजीवी, सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ता और संस्कृतिकर्मी सक्रिय हिस्सेदारी करेंगे।

चौथे महासम्मेलन की थीम है - हासा-भाषा की ग्लोबल लूट की छूट नहीं।

महासम्मेलन का उद्घाटन सत्र 6 मई 2017 को पहले सत्र के रूप में आयोजित होगा। इस बार हमारे खास गोतिया-मेहमान हैं - संताली की वरिष्ठ साहित्यकार डा. दमयंती बेसरा (ओड़िसा), सुप्रसिद्ध लेखक-चिंतक और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रेमकुमार मणि (पटना) व लब्धप्रतिष्ठ आलोचक डा. चौथीराम यादव (बनारस)।

आप सब ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ के चौथे महासम्मेलन में आमंत्रित हैं।

महासम्मेलन के लिए हम आपसे रचनात्मक और आर्थिक सहयोग की भी अपेक्षा रखते हैं। ,
अपना सहयोग देने के लिए आवश्यक जानकारी यहां से प्राप्त करें।

हासा (माटी) और भासा (संस्कृति) बचाइए, महासम्मेलन में जरूर आइए।

जय हो जोहार हो - लड़ाई आरपार हो।

निवेदकः
चौथा अखड़ा महासम्मेलन 2017 की आयोजन समिति की ओर से वंदना टेटे