अखड़ा महासम्मेलन 2017 के अतिथि-गोतिया

अखड़ा महासम्मेलन के उद्घाटन और समापन सत्र में हम देश के सुख्यात लेखकों, कलाकारों, विद्वानों और संस्कृतिकर्मियों को आमंत्रित करते हैं. अब तक अखड़ा के तीन महासम्मेलनों में अनेक जाने-माने लोग शिरकत कर चुके हैं. चौथे महासम्मेलन में शामिल होने वाले अतिथि हैं:

प्रेम कुमार मणि


बहुजन विमर्शकार और चिंतक। 25 जुलाई, 1953 को बिहार के एक स्वतन्त्रता सेनानी परिवार में जन्म। विज्ञान में स्नातक। नालन्दा में भिक्षु जगदीश काश्यप के सान्निध्य में रहकर बौद्ध धर्म दर्शन का अध्ययन भी किया। 1971 में ‘मनुस्मृति’ पर एक आलोचनात्मक पुस्तिका से लेखन की शुरुआत हुई। अब तक तीन कहानी संकलन, एक उपन्यास और लेखों के तीन संकलन प्रकाशित। अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में कहानियाँ अनूदित। कहानी संग्रह ‘अंधेरे में अकेले’ के लिए श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार (1993), साहित्यिक सेवा के लिए बिहार सरकार से राष्ट्रभाषा परिषद का ‘विशेष साहित्य सेवा सम्मान’, विवेकानन्द पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। पटना में रहते हैं और बिहार विधान परिषद् के पूर्व सदस्य तथा राज्यसभा के पूर्व सांसद रह चुके हैं।

दमयंती बेसरा


बारीपदा, उड़ीसा की रहने वाली डा. दमयंती बेसरा संताली साहित्य में सबसे वरिष्ठ नाम है। आपका जन्म 18 फरवरी 1962 को हुआ। वर्तमान में आप एमपीसी ऑटोनोमस कॉलेज में ओड़िया भाषा-साहित्य की विभागाध्यक्ष हैं। 1994 में डा. दमयंती का पहला काव्य-संग्रह ‘जिवी झरना’ प्रकाशित हुआ। संताली साहित्य में यह किसी स्त्राी कवयित्री का संताली भाषा में लिखा गया यह पहला प्रकाशित स्वतंत्र संकलन है। निबंधों का पहला संकलन ‘सागेन सांवहेद’ और दूसरा काव्य संकलन ‘ओ ओत ओग ओल आर जुरी जिता’ 1995 में छपा। ‘गिदराभुलाव कहनी’ जो कथा संकलन है 2010 में प्रकाशित हुआ।

चौथी राम यादव


प्रख्यात आलोचक, दलित विमर्शकार और काशी हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष। 29 जनवरी 1941 को कायमगंज, जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में जन्म। मुख्यतः निबंध एवं आलोचना के क्षेत्र में सक्रिय। समकालीन राजनीति और समाज पर बेबाक टिप्पणियों के लिए चर्चित। ‘छायावादी काव्य: एक दृष्टि’, ‘मध्यकालीन भक्ति काव्य में विरहानुभूति की व्यंजना’, ‘हिंदी के श्रेष्ठ रेखाचित्र’, ‘हजारी प्रसाद द्विवेदी समग्र: पुनरावलोकन’, ‘लोक धर्मी साहित्य की दूसरी धारा’ आदि प्रमुख कृतियां। साहित्य साधना सम्मान (बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना), सावित्री त्रिपाठी सम्मान, अस्मिता सम्मान, कबीर सम्मान, आंबेडकर प्रियदर्शी सम्मान, लोहिया साहित्य सम्मान आदि से सम्मानित। वर्तमान में सेवानिवृत और बनारस में स्थायी निवास।

सुशीला धुर्वे


18 मई 1960 को जबलपुर संभाग, मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आपका जन्म हुआ। आपने अपनी शिक्षा जबलपुर, नैनपुर, मंडला और धार में पूरी की। आप गोंडी आदिवासी भाषा की समर्थ व एक प्रखर विदूषी, लेखिका और चिंतक हैं। गोंडी भाषा, धर्म और संस्कृति पर आपकी दो महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हैं - ‘मेरा गोंडवाना महान’ (2012) और ‘जय गोंडवाना: धर्म, भाषा और इतिहास’ (2014)। हिंदी में आपका एक कथा संकलन ‘बैन गंगा’ (2012) भी प्रकाशित है। इसमें आपकी कुल 9 कहानियां शामिल हैं जिनमें आदिवासी मध्यवर्ग चित्रित हुआ है। फिलवक्त आप इंदौर में रहती हैं।

बिशप निर्मल मिंज


बिशप डॉ. निर्मल मिंज साहित्य अकादमी के भाषा सम्मान से इसी वर्ष सम्मानित हुए हैं। ये पहले व्यक्ति हैं, जिनके कार्यकाल में एकीकृत बिहार के गोस्सनर कॉलेज, रांची में कुड़ुख, मुंडारी, संताली, हो और खड़िया आदिवासी भाषाओं की पढ़ाई शुरू हुई थी। रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। डॉ. मिंज का जन्म 11 फरवरी 1927 को गुमला में हुआ। इनकी स्कूली शिक्षा पटना और उच्च शिक्षा शिकागो में हुई। झारखंड आंदोलन के आप प्रमुख बौद्धिक अगुवा हैं। 90 वर्षीय डॉ. मिंज फिलवक्त डीबडीह में रह रहे हैं।

संजय भालोटिया


रानीगंज, पश्चिम बंगाल के रहने वाले संजय भालोटिया कवि, आलोचक और संस्कृतिकर्मी हैं.

वाहरू सोनवने


1949 में श्रीखेड, जिला-नंदूरबार (महाराष्ट्र) में जन्मेें वाहरू सोनवणे भिलोरी भाषा के वरिष्ठ मराठी आदिवासी कवि और आंदोलनकारी हैं। 1970 से ही आप ‘श्रमिक संघटना’ आदिवासी संगठन से जुड़े हुए हैं और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। मराठी के आदिवासी साहित्य में आप एक प्रमुख हस्ताक्षर हैं। मराठी में अब तक आपके दो कविता संग्रह ‘गोधड’ और ‘निवडक-कविता’ प्रकाशित हो चुके हैं। हिंदी में कविताओं का संग्रह ‘पहाड़ हिल रहे हैं’ शीर्षक से छपी है जिसका स्वागत हिंदी साहित्य में भरपूर हुआ है। कविता संग्रह ‘गोधड’ के लिए 1988 में आपको ‘कुसमानुज’ पुरस्कार मिल चुका है।

मुकुंद नायक


नागपुरी भाषा के लोक गायक मुकुंद नायक इस साल भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किए गए हैं।