‘अखड़ा साहित्य सम्मान 2010’ से सम्मानित देशज-आदिवासी साहित्यकार

Akhra Mahasammelan2010 Awards

झारखण्डी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा के दूसरे महासम्मेलन के अवसर पर झारखण्डी भाषाओं के 20 साहित्यकारों ‘अखड़ा साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया. झारखंडी समाज को अपने इन साहित्यकारों पर गर्व है. जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों और सरकारी उदासीनता के बावजूद अपने साहित्य सृजन से झारखंडी जनता के सांस्कृतिक संघर्ष को अभिव्यक्ति दी है.

‘अखड़ा साहित्य सम्मान 2010’ से अलंकृत होने वाले विभिन्न भाषा समुदायों के ये साहित्यकार हैं -

कुड़ुख भाषा-साहित्य: जस्टिन एक्का (मरणोपरांत) और डा. शांति खलखो
संताली भाषा-साहित्य: सुखलाल हांसदा (मरणोपरांत) और श्री बारीलाल टुडू
हो भाषा-साहित्य: प्रधान गागराई (मरणोपरांत) और श्री डोबरो बुढ़िउली
खोरठा भाषा-साहित्य: श्री श्याम सुंदर महतो एवं गिरिधारी गोस्वामी
पंचपरगनिया भाषा-साहित्य: श्री मननारायण कारजी एवं श्री राजकिशोर साहू
मुंडारी भाषा-साहित्य: डा. सिकरादास तिर्की एवं श्री मनसिद्ध बड़याउद
कुड़मालि भाषा-साहित्य: डा. शशिभूषण महतो काड़वार एवं श्री गनेश्वर महतो
नागपुरी भाषा-साहित्य: श्री कालेश्वर ठाकुर एवं श्रीमती शकुंतला मिश्र
खड़िया भाषा-साहित्य: डा. रोज केरकेट्टा
तथा असुर आदिम आदिवासी भाषा-साहित्य के लिए सुषमा कुमारी असुर

इसके अलावा हिंदी साहित्य में झारखंड की उत्कृष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के लिए हिंदी एवं खोरठा के कथाकार श्री कालेश्वर और झारखंडी संगीत के लिए श्री तेज मुण्डू को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया।

‘पीटर शांति नवरंगी हीरानागपुर साहित्य सम्मान’ पाने वाले साहित्यकारों के नाम की घोषणा नागपुरी प्रचारिणी सभा के महासचिव डॉ. गिरिधारी राम गौंझू ने की। लोहरदगा के गोविंद लोहार को गीत-कविता, अच्चुतानंद शर्मा को शोध अध्ययन, रातू के तीनकौड़ी साहू को नाटक, गुमला की सुश्री आलम आरा को कथा साहित्य और रांची के बीरेन्द्र कुमार महतो को निबंध पत्राकारिता के लिए यह सम्मान प्रदान प्रदान किया गया।

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