भाषा कर रही है दावा
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा का दूसरा महासम्मेलन संपन्न

Second Conference of Jharkhandi Bhasha Sahitya Sanskriti Akhra 2010 held at Ranchi

Akhra Mahasammelan 2010

‘भाषा कर रही दावा’ की केन्द्रीय थीम पर 23-24 अप्रैल 2010 को आयोजित ‘झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’ का दूसरा महासम्मेलन संपन्न हो गया। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को दिल्ली से आए --- सहित नेपाल के रामसुंदर दास, रोज केरकेट्टा, शंभू बादल, श्याम सुंदर महतो, वीपी केशरी और ग्लैडसन डुंगडुंग ने संबोधित किया। … पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर चटका लगाएं. »

अखड़ा महासम्मेलन 2010 में पारित प्रस्ताव

Akhra Mahasammelan 2010

महासम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिनिधि सत्र की शुरूआत सांगठनिक रिपोर्ट पर बहस और वैचारिक-विमर्श से हुई। इस सत्र की अध्यक्षता सुश्री सुषमा असुर, प्रो. मेरी सोरेंग, श्री ए. के. झा, श्री अनंत केसरियार और डॉ. करमचंद्र अहीर के अध्यक्ष मण्डल ने की। इस वैचारिक सत्र में झारखण्डी भाषाओं की समस्या व विकास, केन्द्र एवं राज्य सरकारों की भूमिका तथा भाषायी राजनीति के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिनिधियों ने खुलकर उत्साहजनक भागीदारी की। साथ ही झारखण्डी भाषाओं में निकल रही पत्र-पत्रिकाओं की दशा-दिशा और लिपि के सवाल पर भी लोगों ने अपने विचारों को अभिव्यक्त किया। बासिल किड़ो, महेश अगुस्टीन कुजूर, ईश्वरी प्रसाद, डोबरो बुढ़िउली, काशराय कुदादा, मेलन असुर और शिबनाथ प्रमाणिक जैसे वक्ताओं ने झारखण्डी भाषा और साहित्य की चुनौतियों और सवालों को धरदार तरीके से रखा। सत्र का संचालन मुण्डारी के युवा लेखक सनिका मुण्डा ने की।

इसी सत्र में भाषा-संस्कृति के संरक्षण, विकास और प्रचार-प्रसार पर गंभीर सामूहिक विचार-विमर्श के बाद सांस्कृतिक आंदोलन की रणनीति बनाई गई और व्यापक बहस के बाद कुल 11 प्रस्ताव पारित किये गये।...
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‘झारखण्डी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’
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