झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा का तीसरा महासम्मेलन संपन्न : Third Conference of Jharkhandi Bhasha Sahitya Sanskriti Akhra 2013 grand success

Akhra Mahasammelan 2013

झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा का तीसरा महासम्मेलन शनिवार 7 सितंबर 2013 को रांची विवि के सेंट्रल लाइब्रेरी हॉल में हुआ। अतिथियों का स्वागत हाथ धुला कर और सखुआ पत्ते का बैच पहनाकर किया गया। अतिथियों द्वारा एक मुट्ठी धान को सूप से डलिया में डाल कर अपनी नई पीढ़ी के लिए अपनी भाषा, साहित्य, संस्कृति व समृद्धि के संरक्षण का संदेश दिया गया। नगाड़े की गूंज के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। … पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर चटका लगाएं. »

अखड़ा महासम्मेलन 2013 में पारित प्रस्ताव

Akhra Mahasammelan 2013

झारखण्डी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा के तृतीय महासम्मेलन के सांगठनिक सत्र में भारत के आदिवासी इलाकों में माओवाद के नाम पर हो रहे सैनिक दमन का पुरजोर विरोध किया गया. साथ ही आदिवासी भाषा-संस्कृति और साहित्य संबंधी उपेक्षा के सवाल उठाये गए. सदन का मानना था कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए समूचे आदिवासी इलाके को फौजी छावनी में बदल दिया गया है. सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कठपुतली है और दमन के खिलाफ प्रतिरोध के हर स्वर को दबाया जा रहा है. राजनीतिक-सांस्कृतिक कर्मियों की गिरफ्तारी हो रही है और फर्जी मुठभेड़ों में उन्हें व निर्दोष आदिवासी जनता को मारा जा रहा है. ...
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‘झारखण्डी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा’
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